Supreme Court Invokes ‘Complete Justice’: Strict New Mandates for Indian Universities
| This information has been issued by the Supreme Court. |
2022 में 13,000 छात्रों की जान चली गई पिछले 5 सालों में 118% जातिगत भेदभाव के मामले बढ़े और 18,000 से भी ज्यादा पोस्ट विश्वविद्यालयों में खाली है और तमाम छात्रों को आप सड़कों पर स्कॉलरशिप की लड़ाई करते हुए देख रहे होंगे यह सारे आंकड़े भारत के हायर एजुकेशन से रिलेटेड है जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट को मजबूर किया कि इस मामले में दखल दें तो सबसे पहले हम इस बात की जानकारी लेंगे कि सुप्रीम कोर्ट ने आखिर इन सारे मामलों में दखल क्यों दिया उन नौ निर्देशों की चर्चा करेंगे जो सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दिया है तो 15 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने नौ निर्देश जारी किए हैं एक बेंच है जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की जिन्होंने हायर एजुकेशन से रिलेटेड कुछ निर्देश दिए हैं और यह अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने इस निर्देश को जारी किया है तो सबसे पहले जानते हैं कि संविधान का अनुच्छेद 142 क्या है
Crisis Indicators in Indian Higher Education
| Metric | Statistic | Description |
|---|---|---|
| Student Deaths (2022) | 13,000 | Total student lives lost in the year 2022. |
| Total University Vacancies | 18,000+ | Number of unfilled teaching, non-teaching, and administrative posts,. |
| Caste Discrimination Rise | 118% | The percentage increase in caste-based discrimination cases over the last 5 years,. |
| Central Uni. Teaching Vacancies | ~26% | Percentage of teaching posts currently vacant in Central Universities |
संविधान का अनुच्छेद 142 पूर्ण न्याय यानी कि कंप्लीट जस्टिस की अनुमति सुप्रीम कोर्ट को देता है यह अक्सर अत्यंत आवश्यक मामलों के केस में इस्तेमाल होता है जैसे भोपाल गैस त्रासदी के केस में जो उसके विक्टिम्स थे उनको मुआवजा दिलाना ताजमहल एनवायरमेंट कारणों के वजह से अगर गंदा हो रहा है तो वहां उन सारे मामलों की देखरेख करना और हायर एजुकेशन में सुसाइड्स को देखते हुए स्कॉलरशिप इश्यूज को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कुछ निर्देश जारी किए हैं तो उन नौ निर्देशों का अब हम जायजा लेते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने कैसे निर्देश दिए हैं तो जो सबसे पहला जो निर्देश है वह डाटा मेंटेनेंस से रिलेटेड है तो इसमें सुप्रीम कोर्ट ने बोला है कि 15 से 29 वर्ष के बीच में जो यह ऐज ग्रुप है इस बीच में किसी भी स्टूडेंट्स की डेथ होती है तो एनसीआरबी को उसको डिस्टिंग्विश करना पड़ेगा यानी कि उसको बांटना पड़ेगा कि कौन सी स्कूल गोइंग के स्टूडेंट की डेथ हुई है और कौन सी स्कूल गोइंग स्टूडेंट्स की डेथ नहीं हुई है यानी कि हायर एजुकेशन एंड स्कूल गोइंग में उसको बांटना पड़ेगा दूसरा जो हमारे पास इसका निर्देश है मैंडेटरी रिपोर्टिंग यानी कि जो भी अननेचुरल डे्स होते हैं एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन में उन्हें रिपोर्ट करना होगा हायर एजुकेशन जो अथॉरिटीज हैं जैसे कि फिलहाल यूजीसी है एआईसीटी है इनको रिपोर्ट करना होगा उसके बारे में जानकारी देनी होगी इसके मामले में अब हम देखते हैं मेडिकल एक्सेस पर भी उन्होंने निर्देश दिया है कि हर विश्वविद्यालय में या कोई भी एजुकेशनल इंस्टट्यूट है
New Supreme Court Mandates & Deadlines
| Directive Category | Limit / Deadline | Details |
|---|---|---|
| Vacancy Filling | 4 Months | Time given to authorities to fill all pending vacant posts. |
| Scholarship Resolution | 4 Months | Time limit to resolve all pending scholarship disbursement issues. |
| Medical Facility Radius | 1 km | Maximum distance a medical facility can be from an institution if not available on campus. |
| NCRB Data Tracking | 15–29 Years | The specific age group for which the NCRB must distinguish between school and higher education deaths |
उसमें मेडिकल फैसिलिटी होनी चाहिए अगर नहीं है तो विद इन 1 कि.मी ऑफ रेंज वो फैसिलिटी उपलब्ध करवाई जानी चाहिए साथ ही साथ उन्होंने वैकेंसीज पर बात की है हमने स्टार्टिंग में ही एक डाटा कोट किया था कि 18,000 से भी ज्यादा वैकेंसीज खाली हैं तो वह टीचिंग स्टाफ से भी रिलेटेड है नॉन टीचिंग स्टाफ से भी रिलेटेड है एडमिनिस्ट्रेटिव पोस्ट से भी रिलेटेड है जिसमें वाइस चांसलर रजिस्ट्रार तो इन सारे वैकेंसीज को फिल किया जाना चाहिए विद इन फोर मंथ्स यानी कि 4 महीने के भीतर इन सारे वैकेंसीज को फिल किया जाना चाहिए सुप्रीम कोर्ट ने स्कॉलरशिप पे भी बात की है कि स्कॉलरशिप भी बहुत बड़ा मुद्दा है उसको देखते हुए उन्होंने कहा कि 4 महीने के अंदर जो भी स्कॉलरशिप से रिलेटेड इशूज़ हैं वो सारे क्लियर होने चाहिए और किसी भी स्टूडेंट को स्कॉलरशिप के नाम पर एग्जाम से बाहर कर दिया जाना हॉस्टल से बाहर कर दिया जाना ऐसा नहीं होना चाहिए साथ ही साथ सुप्रीम कोर्ट ने एंटी रैगिंग सेक्सुअल हैसमेंट केसेस पर भी सख्ती बरतने को कहा है तो यह मोटा-माटी सुप्रीम कोर्ट के निर्देश रहे अब यह जानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने आखिर ऐसे निर्देश क्यों दिए सुप्रीम कोर्ट को आखिर एक अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल क्यों करना पड़ा तो इससे रिलेटेड हमारे पास कुछ डाटा है तो जुलाई 2025 में मिनिस्टर ऑफ एजुकेशन ऑफ स्टेट सुकांत मजूमदार ने यह बताया था कि लगभग सेंट्रल यूनिवर्सिटी का ये डाटा मैं आपके सामने दे रही हूं कि लगभग 26% जो सेंट्रल यूनिवर्सिटी में पोस्ट हैं टीचिंग पोस्ट हैं वो खाली हैं और उन 26% में भी जो रिजर्व सीट्स के पोस्ट हैं वह ज्यादा खाली है यानी कि एससी एसटी ओबीसी कैटेगरीज के जो सीट्स हैं वह भरे नहीं गए हैं
New Supreme Court Mandates & Deadlines
| Directive Category | Limit / Deadline | Details |
|---|---|---|
| Vacancy Filling | 4 Months | Time given to authorities to fill all pending vacant posts. |
| Scholarship Resolution | 4 Months | Time limit to resolve all pending scholarship disbursement issues. |
| Medical Facility Radius | 1 km | Maximum distance a medical facility can be from an institution if not available on campus. |
| NCRB Data Tracking | 15–29 Years | The specific age group for which the NCRB must distinguish between school and higher education deaths |
साथ ही साथ हाल ही में यानी कि 2026 में यूजीसी द्वारा डाटा जारी किया गया है जिसमें यह बताया गया है कि पिछले 5 सालों में विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव के मामले 118% बढ़े हैं तो यह सारे शॉकिंग डाटा हैं जिसने सुप्रीम कोर्ट को मजबूर किया कि वह इस सारे मामलों में दखल दें और वहीं स्कॉलरशिप की बात की जाए तो आप तमाम ऐसी न्यूज़ देख रहे होंगे चाहे वो सोशल मीडिया हो चाहे वो अखबार हो जहां पर स्टूडेंट स्कॉलरशिप के लिए प्रोटेस्ट करते हुए आपको नजर आएंगे चाहे वो एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट हो चाहे वह ओबीसी छात्र हो जो दो सालों से जिनको स्कॉलरशिप नहीं मिला वह उस धरने पर बैठे हो तो ऐसे कई सारे न्यूज़ आपको मिल जाएंगे जो स्कॉलरशिप इश्यूज को उजागर करते हैं साथ ही साथ हम यह देखते हैं कि सेक्सुअल हैसमेंट का डाटा हमारे पास लेटेस्ट कोई एग्जैक्ट डाटा नहीं है कि कितनी महिलाएं सेक्सुअल हैसमेंट का शिकार होती हैं या ओवरऑल सेक्सुअल हैसमेंट का केस कितना है इंडियन एजुकेशन में बट जब हम यह देखते हैं कि आरजी कर जो केस हुआ बीएचयू रेप केस जो हुआ वो इस बात का प्रूफ है कि विश्वविद्यालयों में सेक्सुअल हैसमेंट के केस कितने बढ़ गए हैं यहां पे एक हमारी रिसर्च में पता चला है इंटरनेशनल जनरल ऑफ इंडियन साइकोलॉजी का एक रिसर्च पेपर है जो 200 स्टूडेंट का एक सैंपल डाटा लिया था जिसमें से यह पता चला है कि आउट ऑफ 200 स्टूडेंट 160 स्टूडेंट्स ऐसे हैं जो किसी ना किसी तरीके से सेक्सुअल हैसमेंट को फेस किए हैं तो ये सारे तमाम डाटा और तमाम रिसर्च पेपर और डिस्कशन इस बात की गवाही देते हैं कि विश्वविद्यालयों में सेक्सुअल हैसमेंट के केस अभी भी मौजूद हैं और कई जगह पर ऐसे केसेस रिपोर्ट तक नहीं होते हैं तो यह कोई पहली बार नहीं हो रहा है कि सुप्रीम कोर्ट ऐसे मामलों में दखल दे रहा है और ऐसे निर्देश दे रहा है हमने बहुत सारे और भी डायरेक्शंस देखे जो सुप्रीम कोर्ट ने दिया है सितंबर 2025 में भी सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी को कास्ट बेस रिलेटेड इशूज़ के लिए डायरेक्शंस दिए थे वहीं 2009 में सुप्रीम कोर्ट ने रैगिंग से रिलेटेड भी डायरेक्शंस दिए थे तो इस तरीके से हम यह देख सकते हैं कि सुप्रीम कोर्ट टाइम टू टाइम इन सारे मामलों में दखल अंदाजी करते रहता है लेकिन फिर भी हम यह देखते हैं कि इन तमाम डिस्कशन एंड डिबेट्स के बावजूद भी हमारे सामने सेक्सुअल हैसमेंट से रिलेटेड केसेस आते हैं कास्ट डिस्क्रिमिनेशन से रिलेटेड केसेस आते हैं और अक्सर स्टूडेंट्स इस बात की शिकायत करते हुए आपको नजर आएंगे कि उनके विश्वविद्यालय में शिक्षक समय पर मौजूद नहीं है बहुत सारे विषयों की पढ़ाई इसलिए रुक गई है क्योंकि प्रोफेसर्स का रिक्रूटमेंट नहीं हो पाया है तो हम इन सारे मुद्दों को लेकर कंस्ट्रक्टिव क्रिटिसिज्म भी कर रहे हैं तमाम डिबेट्स एंड डिस्कशंस भी हो रहे हैं एजुकेशन इंस्टट्यूट में लेकिन ये सारे डिबेट्स एंड डिस्कशन और जितने भी इनिशिएटिव्स हैं वह पर्याप्त नहीं है और यह जमीनी हकीकत से बिल्कुल दूर है आप इस मामले में क्या सोचते हैं अगर आप भी स्टूडेंट्स हैं और इन सारे परेशानियों को लेकर जूझ रहे हैं तो आप अपनी समस्याओं को हमें कमेंट सेक्शन में बता सकते हैं मेरा नाम है ऋतू देखते रहिए द लन टॉक
Frequently Asked Questions: New Supreme Court Guidelines for Universities
Why did the Supreme Court intervene in the functioning of Indian Universities?
The Supreme Court intervened due to alarming statistics indicating a crisis in higher education. Key triggers included the death of 13,000 students in 2022, a 118% increase in caste-based discrimination cases over the last five years, and widespread protests regarding scholarship delays. Additionally, there are over 18,000 vacant posts across universities.
What legal power did the Supreme Court use to issue these guidelines?
The bench, comprising Justice J.B. Pardiwala and Justice R. Mahadevan, invoked Article 142 of the Constitution. This article empowers the Supreme Court to pass any order necessary to ensure “complete justice” in pending matters.
What is the deadline for filling university vacancies?
The Supreme Court has directed authorities to fill vacancies within four months. This applies to over 18,000 vacant posts, including teaching staff, non-teaching staff, and administrative roles like Vice-Chancellors and Registrars. Currently, approximately 26% of teaching posts in Central Universities are vacant, particularly in reserved categories.
How do the new guidelines protect students regarding scholarships?
The Court mandated that all scholarship-related issues must be resolved within four months. Furthermore, universities are strictly prohibited from barring students from examinations or expelling them from hostels due to delays in scholarship payments.
What are the new requirements for medical facilities on campus?
Every educational institution must have medical facilities available on campus. If this is not possible, facilities must be available within a 1 km radius of the institution.
How will student suicide data be tracked differently moving forward?
The National Crime Records Bureau (NCRB) has been directed to distinguish between school-going students and higher education students in their data for the 15–29 age group. Additionally, authorities like the UGC and AICTE must mandatorily report “unnatural deaths” occurring in educational institutions.
What prompted the strict instructions regarding sexual harassment?
Beyond high-profile cases like the BHU rape case and the RG Kar case, the Court noted research highlighting the prevalence of harassment. One cited study from the International Journal of Indian Psychology revealed that in a sample of 200 students, 160 had faced some form of sexual harassment.
